फसल चक्रण और फसल चक्रण के सिद्धान्त- Fasal Chakrad Aur Fasal Chakrad ke Sidhdant in Hindi
फसल चक्रण (Crops Rotation) किसी खेत में एक निश्चित समय में एक फसल के बाद दूसरी फसल लेने की क्रिया को, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट न होने पाये, 'फसल चक्रण' कहते हैं । "The growing of different crops on a piece of land in a preplanned succession is called as crops rotation." अर्थात् भूमि के किसी निश्चित भाग पर नियत समय में फसलों का इस क्रम से बोया जाना कि भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम न होने पाये और उपज भी अच्छी मिले इस प्रकार की अदला-बदली फसल चक्रण है । फसल चक्रण के सिद्धान्त (Principles of Crop Rotation) - फसलों से अच्छी पैदावार लेने के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति सुरक्षित बनाये रखने के लिए और अधिकतम आर्थिक लाभ कमाने के लिए निम्नलिखित सिद्धान्त अपनाना चाहिए- (1) गहरी जड़ों वाली फसल के बाद उथली जड़ों वाली फसल - गहरी जड़ वाली फसलों के बाद उथली जड़ वाली फसलें बोनी चाहिए। इससे दोनों फसलों की पैदावार अच्छी होती है। इसमें दोनों फसलें एक ही सतह से भोजन न लेकर विभिन्न सतहों से अपना भोजन प्राप्त करती है। इसमें दोनों फसलों को उचित मात्रा में भोज्य पदार्थ मिल जाता है तथा भू...