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Showing posts from February, 2023

इस्लाम एवं सल्तनत कालीन भारत - ISLAM AND SULTANATE PERIOD IN INDIA IN HINDI

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इस्लाम धर्म के प्रमुख सिद्धान्त (Main Principles of Islam) मूल रूप से मुसलमानों के विश्वास के अनुसार इस्लाम धर्म के पाँच मूल स्तंभ या सिद्धांत माने जाते हैं जिन्हें हर मुसलमान अपनी जिन्दगी का मूल विचार मानता है। यह बातें मशहूर हदीस "हदीस ए जिब्रिल" मे बताई गई है - (1) कलमा - 'ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मद-उर-रसूल अल्लाह' अर्थात् अल्लाह के सिवा और कोई परमेश्वर नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं अर्थात् अल्लाह एक है। (2) नमाज - यह एक प्रकार की प्रार्थना है जो अरबी भाषा में एक विशेष नियम से पढ़ी जाती है। इस्लाम के अनुसार, नमाज ईश्वर के प्रति मनुष्य की कृतज्ञता दर्शाती है। यह मक्का की ओर मुँह कर के पढ़ी जाती है। प्रत्येक मुसलमान के लिए दिन में 5 बार नमाज पढ़ना अनिवार्य है। (3) रोजा - इस के अनुसार इस्लामी कैलेण्डर के नवें महीने में सभी सक्षम मुसलमानों के लिए (फरज) सूर्योदय से (मगरिब) सूर्यास्त तक व्रत रखना अनिवार्य है। इस व्रत को रोजा भी कहते हैं। रोजे में हर प्रकार का खाना-पीना वर्जित है। (4) जकात (दान) – यह एक वार्षिक दान है जो कि प्रत्येक आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमान ...

प्राकृतिक शक्तियाँ एवं स्थलमण्डल - NATURAL POWERS AND LITHOSPHERE/ TERRESTRIAL IN HINDI

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प्राकृतिक शक्तियों का मानव जीवन पर प्रभाव (IMPACT OF NATURAL POWERS ON HUMAN LIFE) दिन-रात होने के कारण हमारी पृथ्वी अपनी धुरी पर लगातार घूमती रहती है। और सूर्य का चक्कर लगाती है। पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरे 24 घण्टे में पूरा करती है और जब पृथ्वी यह यक्कर लगाती है तो पृथ्वी के जिस हिस्से पर सूर्य की किरण सीधे पड़ती है उस हिस्से पर दिन और जहाँ सूर्य की किरणें नहीं पहुँचती है उस हिस्से पर रात होती है अतः रात व दिन होने का कारण है पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना । वनों से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं-  (1) वनों से प्राकृतिक सौन्दर्य तथा सन्तुलन बना रहता है।  (2) वनों से फूल व फल मिलते हैं। (3) वनों के कारण भूक्षरण नहीं होता है।  (4) वनों में ही वन्य जीव निवास करते हैं, जैसे- शेर, चीता, भालू आदि । चन्द्रमा की विशिष्ट गतियाँ (Specific Motions of Moon)  पृथ्वी के समान चन्द्रमा की भी अपनी विशिष्ट गतियाँ होती हैं जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है- (1) घूर्णन -चन्द्रमा अपने अक्ष के चारों ओर लगभग 29 दिनों से कुछ अधिक समय में एक घूर्णन / परिभ्रमण पूर्ण करता है। इस अवधि को चन्द्र...

भारत में प्रथम साम्राज्य की स्थापना-FOUNDATION OF FIRST EMPIRE IN INDIA IN HINDI

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 मौर्य वंश (MAURYAN DYNASTY) मौर्य इतिहास के स्रोत (Sources of Mauryan History) मौर्य इतिहास के सन्दर्भ में दो प्रकार के स्रोत उपलब्ध हैं-  (1) साहित्यिक स्रोत (Literary Sources) - साहित्यिक स्रोतों में कौटिल्य का अर्थशास्त्र, विशाखदत्त का मुद्राराक्षस, मेगस्थनीज की इण्डिका, बौद्ध साहित्य और पुराण हैं।  (i) अर्थशास्त्र - यह पुस्तक कौटिल्य (चाणक्य) के द्वारा राजनीति और शासन के बारे में लिखी गई है। यह पुस्तक मौर्य काल के आर्थिक और राजनीतिक स्थिति के बारे में बताती है। कौटिल्य, चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रधानमंत्री था। (ii) मुद्रा राक्षस - यह पुस्तक गुप्तकाल में विशाखदत्त द्वारा लिखी गई। यह पुस्तक बताती है कि किस तरह चन्द्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की मदद से नन्द वंश को पराजित किया था। (iii) बौद्ध साहित्य -बौद्ध साहित्य जैसे जातक मौर्य काल के सामाजिक-आर्थिक स्थिति के विषय में बताते हैं जबकि बौद्ध वृतांत महावंश और दीपवंश अशोक के बौद्ध धर्म को श्रीलंका तक फैलाने की भूमिका के बारे में बताते हैं । तिब्बत बौद्ध लेख भी अशोक के बौद्ध धर्म का प्रचार करने के योगदान के बारे में जानकारी देते...

मानव शरीर के अंग एवं कार्य - PARTS AND FUNCTIONS OF HUMAN BODY IN HINDI

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मानव शरीर के कुछ मुख्य अंग (Some Major Parts of Human Body) मानव शरीर के कुछ मुख्य अंग निम्नलिखित है- (1) सिर (Head)- सिर शरीर के सबसे ऊपरी भाग में स्थित है, जो ग्रीवा द्वारा धड़ से जुड़ा रहता है। सिर के दो भाग होते है-पहला भाग कपाल जो 8 अस्थियों से बना होता है तथा इसी में मस्तिष्क रहता है तथा दूसरा भाग कपाल के नीचे वाला हिस्सा होता है जिसे आनन (Face) कहते हैं। इसी में नेत्र, नासिका, कपाल, मुख तथा कान होते है। (2) मस्तिष्क (Brain)- मस्तिष्क अधिकांश जीव जन्तुओं के शरीर का आवश्यक अंग है। वयस्क मनुष्य में इसका भार लगभग 1350 से 1400 ग्राम होता है। यह खोपड़ी की कपालगुहा में सुरक्षित होता है। मस्तिष्क शरीर में होने वाली सभी प्रकार की शारीरिक गतियों का संचालन करता है तथा शरीर के प्रत्येक कार्य तथा अंग में होने वाले कार्य को नियन्त्रित एवं नियमित रखता है। (3) ग्रीवा (Neck)- सिर तथा घड़ के मध्य का पतला भाग ग्रीवा कहलाता है। जिसमें से होकर धमनियाँ वृक्ष से सिर में जाती हैं तथा शिराएँ तथा तन्त्रिकाएँ ग्रासनली और श्वासनाल वृक्ष में जाते है। (4) घड़ (Trunk ) - शरीर के अनेक अंग धड़ में रहते है। घड़...

जीवन की क्रियाएँ - ACTIVITIES OF LIFE IN HINDI

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पौधों और जन्तुओं में तुलना (Compare the Plants and Animals) पौधे एवं जन्तु दोनों सजीव प्राणी होते हैं। वे भोजन, श्वसन, वृद्धि, गतिशीलता, पुनरूत्पादन करते हैं तथा अपने वातावरण के प्रति संवेदनशील होते है। पौधों एवं जन्तुओं में विभिन्न समानताएं निम्नलिखित है- (1) भोजन (Feeding)- पौधे एवं जन्तु दोनों को ऊर्जा के लिए भोजन की आवश्यकता होती है लेकिन उनके तरीके अलग-अलग होते हैं। जन्तु, पौधे तथा अन्य जानवरों को खाते हैं लेकिन पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। वे मिट्टी से हवा, पानी एवं पोषक तत्व लेकर खाना बनाने के लिए सूर्य के प्रकाश का उपयोग करते हैं। (2) श्वसन (Respiration) - पौधे एवं जन्तु दोनों ही श्वसन करते हैं। जीव-जन्तु वायु से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा कार्बन डाई आक्साइड छोड़ते हैं। पेड़-पौधों में श्वसन प्रक्रिया पर्णरन्ध्र के माध्यम से होती है। (3) उत्सर्जन (Excretion) - पौधे एवं जन्तु दोनों अपशिष्ट पदार्थों का उत्सर्जन करते हैं। उत्सर्जन से तात्पर्य शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को दूर करना होता है। पौधे प्रायः पुरानी छाल, पत्तियों एवं शाखाओं को अपने से अलग करते रहते हैं। इसी प्रकार जन्तु ...

जीवों की संरचना- STRUCTURE OF ORGANISM IN HINDI

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 जीवों की संरचना (STRUCTURE OF ORGANISMS) कोशिका (Cell) कोशिका किसी जीव की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई होती है। कोशिका शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के 'सेलुला (Cellula) शब्द से हुई, जिसका अर्थ एक छोटी कोठरी होती है। कोशिका प्रत्येक जीवधारी की कार्यात्मक एवं संरचनात्मक इकाई होती है। सभी सजीवों की कोशिकाओं की संरचना, आण्विक संगठन तथा जैव क्रियाएँ समान होती हैं। एक कोशिकाओं वाले जीवों, जैसे- जीवाणु, प्रोटोजोआ और यीस्ट आदि को एककोशिकीय जीव (Unicellular Organisms) तथा एक से अधिक कोशिका वाले जटिल जीवों को बहुकोशिकीय जीव (Multicellular Organisms) कहते हैं। कोशिका की खोज (Discovery of Cell) सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने सन् 1665 में यह पाया कि सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखने पर कॉर्क का एक टुकड़ा मधुमक्खी के छत्ते जैसा लगता है। उन्होंने उस मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना के प्रत्येक भाग को कोशिका (Cell) नाम दिया। प्राणियों तथा पादपों पर आगे शोध करने पर पता चला कि सभी जीवधारी कोशिकाओं से बने हुए हैं। जीवद्रव्य (Protoplasm) किसी भी कोशिका की कोशाभित्ति को छोड़कर शेष सम्पूर्ण भाग 'जीवद्रव्य' कहल...