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Showing posts from October, 2023

विज्ञान चालीसा (Vigyan Chalisa)

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 जय न्यूटन विज्ञान के आगर, गति खोजत ने भरि गये सागर ग्राहम बेल फोन के दाता, जनसंचार के भाग्य विधाता बल्ब प्रकाश खोज करि लीन्हा,  मित्र एडीशन परम प्रवीना वॉयल और चार्ल्स ने जाना, ताप,  दाब सम्बन्ध पुराना नाभिक खोजि पदम गतिशीला,  रदरफोर्ड है अतिगुणशीला खोज करत जब थके टामसन,  तवंहि भये इलेक्ट्रान के दर्शन जबहि देखि न्यूट्रॉन को पाय, जेम्स चैडविक अति हर जाये भेद रेडियम करत बखाना, मैडम क्यूरी परम सुजाना वने कार्बनिक दैव शक्ति से,  बर्जीलियस के शुद्ध कथन से बनी यूरिया जब वोहलर से,  सभी कार्बनिक जन्म यही से जान डॉल्टन के गूंजे स्वर, आंशिक दाब के योग बराबर जय जय जय द्विचक्र वाहिनी, मैकमिलन की भुजा दाहिनी सिलने हेतु शक्ति के दाता,  एलियास हैं भाग्य विधाता सत्य कहूं यह सुन्दर वचना,  ल्यूवेन हुक की है यह रचना कोटि सहस्त्र गुना सब दीखे,  सूक्ष्म वाल भी दण्ड सरीखे देखहि देखि कार्क के अन्दर,  खोज कोशिका है अति सुन्दर काया की जिससे भयी रचना,  राबर्ट हुक का था यह सपना टेलिस्कोप का नाम है प्यारा,  मुट्ठी में ब्रह्माण्ड है सारा गैलिलियो ने ...

जनन या प्रजनन(Reproduction)

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क्या आपको पता है कि किसी जीव की एक जाति काफी लम्बे समय तक अपना अस्तित्व किस प्रकार ए रखती है। जबकि उसका जीवनकाल बहुत कम या निश्चित वर्षों तक ही होता है। इसके बाद उसकी हो जाती है। यह संभव होता है प्रजनन क्रिया के द्वारा । जीव अपने जीवनकाल में ही नए जीवों को प्रजनन द्वारा जन्म देता है। इससे जाति की निरन्तरता बनी रहती है और उस जीव की जाति लुप्त नहीं हो पाती है। Contents जनन के प्रकार (Type of Reproduction ) जीवों में प्रजनन की अनेक विधियाँ पायी जाती हैं। इन विधियों को निम्न भागों में बाँट सकते हैं:- 1.लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) 2.अलैंगिक जनन (Asexual 3.Reproduction) कायिक जनन (Somatic Reproduction) 1. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction):- प्रजनन की इस विधि में नर एवं मादा के जनन अंग का होना आवश्यक है। पौधों में लैंगिक जनन- पौधों में लैंगिक जनन जानने से पूर्व पुष्प की संरचना का ज्ञान होना आवश्यक है। पुष्प की संरचना (Structure of flower) एक सामान्य पुष्प (सरसों) के निम्नांकित भाग होते हैं- 1. वाहय दल पुंज (Calyx ) - सरसों के पुष्प में इनकी संख्या चार होती है। ये हरे-प...

नाखूनों में इंफेक्‍शन को दूर करने के कई प्रकार के घरेलू उपयोग

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नाखून में इन्फेक्शन एक साधारण प्रकार की रोगाणु संक्रमण है जो नाखून के चारों ओर की त्वचा या नाखून ऊतक को प्रभावित करता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि ट्रॉमा (नाखून के जख्म होना), अशुद्ध नाखूनों का उपयोग करना, नाखूनों को बीमारीग्रस्त जगहों से संपर्क करना, या त्वचा में फंगल इन्फेक्शन। Contents नाखून में इन्फेक्शन के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं: 1.नाखून के आसपास की त्वचा में सूजन 2.लाल या नीली रंग की त्वचा 3.दर्द या खुजली 4.पसीने का बहाव 5.नाखून का पतला हो जाना 6.नाखून के आसपास परतदार पत्तियों का उभरना यदि आपको लगता है कि आपके नाखून में इन्फेक्शन हो सकता है, तो मैं सलाह देता हूँ कि आप एक चिकित्सक से मिलें। चिकित्सक आपके लक्षणों का मूल्यांकन करेंगे और उचित उपचार की सिफारिश करेंगे।  नाखूनों में इंफेक्‍शन(nail infection in hindi) नाखूनों में संक्रमण (infection) कई कारणों से हो सकता है और यह आपके नाखूनों को प्रभावित कर सकता है। यहां कुछ संभावित कारण दिए गए हैं: अनुचित नाखूनों की देखभाल: नाखूनों की सही देखभाल न करने से उनमें संक्रमण हो सकता है। अगर आप अपने नाखूनो...

पेट के पाचन रखने वाले 10 फाइबर फ्रूट्स

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दोस्तों rahultechnoweb पर आपका तहे दिल से अभिनंदन हैं इस पेज पर आप लोगों कोपेट के पाचन  दूर करने के उपाय को विस्तार से पढ़कर अपने पेट का इन्फ़ेक्सन दूर कर सकते हैं। आज के समय में पेट के पाचन  होना एक बड़ी समस्या बन गयी है लोग ना जाने कौन कौन माध्यमों सेपेट के पाचन  दूर  करने का तरीका बता रहे है लेकिन उससे आपको कोई फायदा नही हो रहा है  और नुकसान ज्यादा से ज्यादा  हो रहा  है कुछ लोग तो केवल पैसे कमाने के लिए  पेट के पाचन दूर करने  की दवाइयाँ बेंच रहे हैं ।  जिनका कोई फायदा नहीं हो रहा है । और हा हम इस पोस्ट में वैसा नहीं बताएंगे , हम इस पोस्ट में आपको कुछ जबरदस्त नुक्से बताने वाले हैं । जो आपको फायदा को छुड़ाय नुकसान नही होगा। नीचे दिये गये तरीको से पेट के पाचन  दूर कर सकते हैं ,इन तरीको का इस्तेमाल रोजाना करकेपेट के पाचन  दूर कर सकते हैं  यदि इन तरीको का इस्तेमाल अच्छे से किया तो आपके पेट के पाचन अवश्य दूर हो जाएगा । Contents पेट का ना पचना या पाचन दुर्बलता अपच के रूप में जानी जाती है और यह एक आम स...

विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science and Technology)

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विज्ञान ने हमारे दैनिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है। प्रातः जागने से लेकर रात्रि सोने तक किया जाने वाला प्रत्येक कार्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रभाव से दिनोंदिन लगातार आसान बनता जा रहा है। विज्ञान नित नयी प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए हमारे जीवन को सरल करने का लगातार प्रयास कर रहा है। प्रत्येक नयी प्रौद्योगिकी के प्रयोग से हमारी दिनचर्या तथा कार्यशैली में सुधार आया है।  Contents मनुष्य की मुख्य आवश्यकताओं में कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य सुविधा आदि हैं। आइए, विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रयोग से होने वाले परिवर्तनों का हम अध्ययन करते हैं। 1-कृषि में विज्ञान और प्रौद्योगिकी:- पहले हल, बैल से खेत की जुताई की जाती थी इसमें श्रम और समय अधिक लगता था। ट्रैक्टर के आविष्कार से खेत जोतना आसान हो गया। इसमें विज्ञान और कल्टीवेटर द्वारा प्रौद्योगिकी में सुधार करते हुए रिमोट चालित ट्रैक्टर का आविष्कार कर लिया गया है। इसी प्रकार पहले तालाब या किसी बड़े गड्ढे से दो आदमी किनारे खड़े होकर बेड़ी द्वारा सिंचाई करते थे। ढेकुली और रहट द्वारा भी...

वैज्ञानिक परिचय (Scientist Introduction)

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वैज्ञानिकों ने ही हमारे दैनिक वन से संबंधित भोजन, चिकित्सा, यात्रा, सुरक्षा, मौसम, वस्त्र दि के बारे में जानकारी कराते हुये विज्ञान की विभिन्न शाखाओं - रसायन, भौतिक, जीव, अंतरिक्ष, सैन्य विज्ञान आदि का ज्ञान ।  इनमें से प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के रूप में चरक, सुश्रुत, अर्जुन, कणाद, होमी जहाँगीर भाभा, प्रो. सतीश धवन, विक्रम भाई, सी0वी0 रमन, जे0सी0 बोस, ए0पी0जे0 अब्दुल आदि जाने जाते हैं। वैज्ञानिक परिचय  (Scientist Introduction) आइये इन्हीं वैज्ञानिकों में से कुछ निकों के जीवन एवं उपलब्धियों से संबंधित जानकारी प्राप्त करते हैं। Contents 1.नागार्जुन नागार्जुन प्राचीन भारत के महान रसायन शास्त्री (Chemist), धातु विज्ञानी और चिकित्सक (Doctor) जिन्होंने रसायन विज्ञान, धातु विज्ञान और दवाइयाँ बनाने के क्षेत्र में बहुत शोधकार्य (Research) किये और पुस्तकें लिखीं। माना जाता है कि नागार्जुन का जन्म 50 ईसा पूर्व छततीसगढ़ प्रदेश के रायपुर जिले के बालूका ग्राम में था। इन्होंने बचपन में ही वेद-वेदांगों का अध्ययन पूर्ण कर लिया तथा दुनिया को अपनी खोजों के द्वारा संदेश दिया ...